Monday, May 24, 2010

सूनी सांझ

मेरी सबसे प्रिय कविता । शिवमंगल सिंह सुमन द्वारा रचित सूनी सांझ ।  बारहवी कक्षा में पढाई गयी कविता आज भी याद आती है । हालाकि मुझे यह कविता कंटस्थ तो थी, लेकिन फिर भी मैंने कई बार इसे इन्टरनेट पर ढूँढने का प्रयास किया । और फिर मुझे  मिला http://www.kavitakosh.org जहाँ पर हिंदी कविताओं का एक भरमार मौजूद है ।  तो अगर आप में से   जो कोई भी हिंदी कविताओं में रूचि रखते हैं, वे ज़रूर इस वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं  । और उसके पहले मेरी प्रिय कविता सूनी सांझ को एक बार ज़रूर पढ़े ।


सूनी सांझ


बहुत दिनों में आज मिली है
साँझ अकेली, साथ नहीं हो तुम ।


पेड खडे फैलाए बाँहें
लौट रहे घर को चरवाहे
यह गोधुली, साथ नहीं हो तुम,


बहुत दिनों में आज मिली है
साँझ अकेली, साथ नहीं हो तुम ।


कुलबुल कुलबुल नीड-नीड में
चहचह चहचह मीड-मीड में
धुन अलबेली, साथ नहीं हो तुम,


बहुत दिनों में आज मिली है
साँझ अकेली, साथ नहीं हो तुम ।


जागी-जागी सोई-सोई
पास पडी है खोई-खोई
निशा लजीली, साथ नहीं हो तुम,


बहुत दिनों में आज मिली है
साँझ अकेली, साथ नहीं हो तुम ।


ऊँचे स्वर से गाते निर्झर
उमडी धारा, जैसी मुझपर-
बीती झेली, साथ नहीं हो तुम,


बहुत दिनों में आज मिली है
साँझ अकेली, साथ नहीं हो तुम ।


यह कैसी होनी-अनहोनी
पुतली-पुतली आँख मिचौनी
खुलकर खेली, साथ नहीं हो तुम,


बहुत दिनों में आज मिली है
साँझ अकेली, साथ नहीं हो तुम ।


   - डॉक्टर शिवमंगल सिंह 'सुमन'

2 comments:

  1. Do you want to be a KBC lucky winner? Come and visit our blog to to get participate in KBC Lottery winners 2018.
    KBC Lucky Winners

    ReplyDelete
  2. Get participate in KBC Lucky Draw 2018 by visiting our website we will give you the opportunity to become kbc lucky winners.
    KBC Lucky Winners

    ReplyDelete

Creative Commons License

Creative Commons License This work is licensed under a Creative Commons Attribution-Noncommercial-No Derivative Works 3.0 Unported License. Copy Pasting from this site is allowed only if you give credits. Ok ?